हिमाचल सरकार द्वारा BBMB (भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड) और अन्य हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर लगाए गए इस 2% लैंड रेवेन्यू (Land Cess) का सीधा वित्तीय बोझ उन राज्यों पर पड़ेगा जो इन परियोजनाओं से बिजली और पानी प्राप्त करते हैं।
चूँकि BBMB एक सांझा उपक्रम (Partnership) है, इसलिए इसका खर्च पार्टनर राज्यों द्वारा वहन किया जाता है। मुख्य रूप से निम्नलिखित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर इसका सबसे ज्यादा असर होगा:
1. पंजाब (Punjab) — सबसे बड़ा वित्तीय बोझ
* प्रभाव: पंजाब BBMB की परियोजनाओं (भाखड़ा और पोंग डैम) से बिजली और सिंचाई के पानी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है।
* वित्तीय बोझ: BBMB के कुल खर्च का लगभग 50% से अधिक हिस्सा पंजाब वहन करता है। लैंड रेवेन्यू के रूप में जो अतिरिक्त ₹436 करोड़ BBMB को चुकाने होंगे, उसका आधा हिस्सा (करीब ₹220 करोड़) सीधे तौर पर पंजाब सरकार या पंजाब पावर कॉर्पोरेशन (PSPCL) की जेब से जाएगा।
* नतीजा: पंजाब में प्रति यूनिट बिजली की लागत बढ़ सकती है।
2. हरियाणा (Haryana)
* प्रभाव: हरियाणा BBMB का दूसरा सबसे बड़ा भागीदार है। राज्य की कृषि और औद्योगिक बिजली आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा बीबीएमबी प्रोजेक्ट्स से आता है।
* वित्तीय बोझ: हरियाणा को सालाना करीब ₹130 से ₹150 करोड़ का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ सकता है।
* नतीजा: राज्य में किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली की कीमतों का दबाव बढ़ेगा।
3. राजस्थान (Rajasthan)
* प्रभाव: राजस्थान भाखड़ा और पोंग डैम से अपनी नहरों (जैसे इंदिरा गांधी नहर) के लिए पानी और बिजली लेता है।
* वित्तीय बोझ: राजस्थान को भी अपनी हिस्सेदारी के अनुसार करीब ₹50 से ₹70 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
4. केंद्र शासित प्रदेश: चंडीगढ़ और दिल्ली (Chandigarh & Delhi)
* चंडीगढ़: शहर की पूरी पानी की आपूर्ति (Kajauli Waterworks) और बिजली का बड़ा हिस्सा BBMB पर निर्भर है। इस सेस के कारण चंडीगढ़ प्रशासन के बिजली-पानी के बिल बढ़ेंगे।
* दिल्ली: दिल्ली को मिलने वाली बिजली और पीने के पानी (Yamuna/Sutlej share) की कॉस्ट बढ़ेगी, जिसका भार दिल्ली के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
राज्यों पर पड़ने वाला अनुमानित वार्षिक बोझ (Summary Table)
| राज्य / UT | अनुमानित हिस्सा (Share) | अतिरिक्त वार्षिक बोझ (Estimated) |
|—|—|—|
| पंजाब | ~ 50% – 55% | ₹220 – ₹240 करोड़ |
| हरियाणा | ~ 30% – 35% | ₹130 – ₹150 करोड़ |
| राजस्थान | ~ 10% – 15% | ₹50 – ₹70 करोड़ |
| चंडीगढ़/दिल्ली | ~ 2% – 5% | ₹15 – ₹25 करोड़ |
विवाद की मुख्य वजह: क्यों हो रहा है विरोध?
पंजाब और हरियाणा की सरकारें इस टैक्स का विरोध इसलिए कर रही हैं क्योंकि:
* Double Taxation: वे इसे ‘वाटर सेस’ का ही दूसरा रूप मानती हैं जिसे कोर्ट पहले ही अवैध बता चुका है।
* Reorganization Act: पंजाब का तर्क है कि 1966 के पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के तहत BBMB की संपत्तियों पर हिमाचल अकेले टैक्स नहीं लगा सकता।
* Power Purchase Agreements (PPAs): जो अन्य प्रोजेक्ट्स (जैसे SJVN/NHPC) हैं, उनकी बिजली की दरें (Tariff) बढ़ जाएंगी, जिससे आम जनता को महंगी बिजली मिलेगी।
निष्कर्ष
हिमाचल सरकार के इस फैसले से पंजाब और हरियाणा सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। यह मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट या ट्रिब्यूनल में जा सकता है क्योंकि पड़ोसी राज्य पहले से ही बिजली की ऊँची दरों और वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं।
नोट:रिपोर्ट AI data पर आधारित
